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क्या मैं बहक गई थी…?

मैं बहक गई थी और यह मानने में मुझे कोई अफ़सोस नहीं। जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब मेरा पति मुझसे दूर था। उसी खालीपन में एक पुराना प्यार फिर से सामने आया, जिसने मुझे वह अपनापन दिया जो मैं भूल चुकी थी। उस एक सच ने हमारी शादी को तोड़ा नहीं, बल्कि उसे आईना दिखा गया।

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तीर्थ : आत्मा की यात्रा

तीर्थ केवल स्थान नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। जब जीवन की भागदौड़ में मन थक जाता है, तीर्थ हमें भीतर की शांति और ईश्वर के सान्निध्य की ओर ले जाता है। भारत के चार धाम बद्रीनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथपुरी और द्वारका सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं। तीर्थ यात्रा हमें अपने भीतर झाँकने, अहंकार छोड़ने और देश, संस्कृति व आत्मा से जुड़ने का अवसर देती है।

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