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क्या मैं बहक गई थी…?

मैं बहक गई थी और यह मानने में मुझे कोई अफ़सोस नहीं। जब मुझे सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब मेरा पति मुझसे दूर था। उसी खालीपन में एक पुराना प्यार फिर से सामने आया, जिसने मुझे वह अपनापन दिया जो मैं भूल चुकी थी। उस एक सच ने हमारी शादी को तोड़ा नहीं, बल्कि उसे आईना दिखा गया।

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यूँ आज़माना नहीं चाहिए…

आज हमें किसी बहाने से परखा नहीं जाना चाहिए। दिल चाहता है कि हम सिर्फ उसी के दिल में रहें और किसी और ठिकाने की तलाश न करें। अगर बरसना है तो पूरी ताकत से बरसें, क्योंकि बाद का मौसम सुहाना नहीं चाहिए। हमें काम करते रहना चाहिए, राह में चलते रहना चाहिए, और व्यर्थ में समय गंवाना ठीक नहीं। नई खोज और नए काम होने चाहिए; वही पुराने राग हमें नहीं चाहिए। मुश्किलों में जो काम आता है, उसे बाद में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वे भावनाएँ और ख़त, जो हमने लिखे हैं, उन्हें जलाना नहीं चाहिए। और जब दर्द मिले, उसे आँखों से महसूस करो; आँसुओं को दबाना ठीक नहीं।

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