Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

जमीन

दीनानाथ त्रिपाठी ने अपने भतीजे राजू को समझाया कि माता समान इस जमीन को बेचने का विचार गलत है। परिवार की परंपरा, मेहनत और भविष्य की सुरक्षा के लिए जमीन अनिवार्य है, जबकि राजू शहर और विदेश के खर्चों के कारण जल्दबाजी में निर्णय लेना चाहता था।

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छोड़ आये अपना वो गांँव…

“छोड़ आये अपना वो गाँव” में कवि अपने बचपन और गाँव की यादों को भावपूर्ण ढंग से व्यक्त करते हैं। यह कविता गाँव की सरल, प्राकृतिक और आत्मीय जीवन शैली के सुंदर चित्रण से भरी है—बैलगाड़ियाँ, खेतों की हरियाली, पनिहारन की पायल की झनकार, बुजुर्गों की चौपाल और सुबह की ग्रामीण रौनक। शहर की चमक-धमक, गगनचुंबी इमारतें और व्यस्त जीवन के बीच कवि को गाँव की मिट्टी, पेड़ों की छांव और अपनापन याद आता है। कविता यह दर्शाती है कि चाहे जीवन कितनी भी व्यस्त या आधुनिक क्यों न हो, अपने गाँव और सरल जीवन की याद हमेशा हृदय में बनी रहती है, और व्यक्ति को फिर से लौटने की लालसा जगाती है।

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