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परिवार के बीच अपनी पीड़ा छिपाती भावुक भारतीय महिला की यथार्थवादी छवि

विष वमन

राजेश्वरी ने परिवार की खुशियों के लिए अपनी पीड़ा को वर्षों तक भीतर दबाए रखा। रिश्तों में मिले विश्वासघात और शोषण का विष आखिर कितना सहा जा सकता है? यह कहानी उसी अनकही पीड़ा और मौन आह की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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