साहित्य नया साल LIVE WIRE NEWS NETWORK7 months ago7 months ago91 mins यह रचना सालों के बदलने के बहाने मनुष्य की आदतों, हिंसा और संवेदनहीनता पर तीखा व्यंग्य है। 2025 और 2026 के संवाद के माध्यम से कवि यह प्रश्न उठाता है कि क्या नया साल सच में नया होता है, या वही पुरानी शरारतें नए कैलेंडर के साथ आगे बढ़ जाती हैं। Read More