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औकात

कहानी राधिया नाम की झुग्गी बस्ती में रहने वाली एक स्त्री की है, जो एक समाजसेवी “मैडम जी” से मिलकर नई उम्मीदों से भर जाती है। उसे लगता है कि अब उसका जीवन बदल जाएगा . उसे नौकरी मिलेगी, सम्मान मिलेगा, और अपने बच्चों को शिक्षित कर सकेगी। पर जब वह काम के लिए मैडम जी के घर पहुँचती है, तो देखती है कि वही “मैडम जी” अपने पति के अत्याचार का शिकार हैं। यह दृश्य राधिया की सारी कल्पनाओं को तोड़ देता है। उसे एहसास होता है कि औरत चाहे अमीर हो या गरीब, उसके दर्द और संघर्ष एक जैसे हैं।

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भय

“अब का भूल जाओ सब और अपनी छोटी बेटी पर ध्यान दो” — कहकर मातादीन छोटे ठाकुर की गाड़ी चलाने चला गया। राधा की मौत से टूटा, मगर डर से बंधा बाप अपने आंसू निगल गया। ये सिर्फ़ एक बेटी की कहानी नहीं, पूरे सिस्टम की चुप्पी की चीख़ है, जहां ज़िंदगी से ज्यादा बड़ी होती है रोटी की मजबूरी और डर।

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