विनोद कुमार शुक्ल : देह से विदा, साहित्य में सदा

विनोद कुमार शुक्ल भले ही देह से विदा हो गए हों, पर उनकी लेखनी आज भी साँस लेती है। उनके शब्दों की मंत्रमुग्धता पाठक को यह एहसास कराती है कि सच्चा साहित्य कभी समाप्त नहीं होता, वह चेतना में जीवित रहता है।

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