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कुछ मनकही

कभी-कभी ज़बान से निकले जुमले इतने तेज़ और धारदार होते हैं जैसे कमान से छूटा हुआ तीर।
जिसका ज़िक्र दिल की धड़कनों में रच-बस जाए, उसे भला जान से कैसे जुदा किया जा सकता है?
पर सच यह है कि कुछ बातों में दम नहीं होता।
लोग अपने ही बयान से हल्के और खोखले साबित हो जाते हैं। कभी ऐसा भी हुआ कि किसी ने मुझे देख लिया और छिप गया, जैसे मैं ही उसके सामने आईना हूँ। उस पल महसूस हुआ कि मकान से बाहर निकलते ही इंसान अपने असली रूप में आ जाता है।

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मुझसे मुझ तक…

प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।

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