Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

डाकिया डाक लाया

जब मोबाइल और ई-मेल नहीं थे, तब खत ही रिश्तों की धड़कन हुआ करते थे। पोस्टकार्ड से लेकर लिफाफे तक, हर पत्र में सिर्फ़ खबर नहीं, पूरा जीवन लिखा होता था। यह कहानी उसी इंतज़ार, उस स्याही और उन भावनाओं की है, जो आज भी दिल को भिगो देती हैं।

Read More

रील्स की चमक में खो गई वो पुरानी शादी

कभी शादियाँ सिर्फ दो लोगों का नहीं, पूरे मोहल्ले का उत्सव हुआ करती थीं। ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले बन्ने-बन्नी के गीत, बुआ-मौसी की हंसी, आँगन में उबलती खीर . सब जैसे आज भी स्मृतियों में ताजे हैं। पर अब शादी की रस्में कैमरे की फ्रेमिंग में बंध गई हैं, और भावनाएँ फिल्टरों के नीचे धुंधली।

Read More

ढोल थम गया, दिल थम गया

कभी शादियों में ढोल की लय और “नागिन डांस” की धुन पर दिल बेक़ाबू होकर थिरक उठते थे। अब कहीं न ताल बची है, न वो मस्ती। DJ के शोर में मानो रिश्तों की गर्माहट दब गई है। दूल्हा-दुल्हन भी कैमरे की कैद में इतने बंध गए हैं कि लगता है मानो शादी नहीं, कोई बड़ा फोटोशूट चल रहा हो। कभी घरों में उठने वाली खुशी, हँसी-ठिठोली और अपनापन अब बस दिखावे की चमक में धुंधला गया है। वक्त बदल गया है पर शायद मन अब भी उसी खोई हुई सरलता, सादगी और आत्मीयता को खोज रहा है।

Read More