Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

रात के नौ बजे, जब किस्मत जागती थी…

रात के ठीक नौ बजते ही महिदपुर रोड की रफ्तार बदल जाती थी। दादाभाई की दुकान के आसपास भीड़ सिमटने लगती, आँखों ही आँखों में फैसले हो जाते और किस्मत अपने पत्ते खोलने को तैयार रहती। नंबर खुलते ही कोई भीतर ही भीतर टूट जाता, तो कोई ऑपरेशन थिएटर के सफल होने जैसी राहत महसूस करता। वलन मिलते ही गर्म दूध के कड़ाह चढ़ जाते, मावाबाटी और रबड़ी के ऑर्डर लगते और पुरानी उधारियाँ मिठास में घुलकर उतर जातीं।यह सिर्फ़ सट्टे का खेल नहीं था. यह एक पूरे कस्बे की रातों की धड़कन थी।

Read More