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रास आई न तन्हा है ये ज़िंदगी

ज़िंदगी तन्हा लगती है जब तक कोई साथी नहीं होता। चाहे कितनी भी भक्ति कर लो या चारों ओर दुनिया की दौड़-धूप हो, दिल को सुकून केवल किसी प्रिय के साथ से मिलता है। तन्हाई चारों ओर हो तो हर खुशी अधूरी लगती है, और सिर्फ एक साथी के होने से ही जीवन में हल्की मुस्कान और राहत महसूस होती है। जीवन की सच्ची सुंदरता तब उजागर होती है जब कोई पास हो, बातों में मुस्कान बिखेरता हो और हर ग़म को कम कर देता हो। यही सरल, पर अनमोल एहसास है — एक साथी का होना ही जीवन को पूरा बनाता है।

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