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नृत्य मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाती महिला

समर्पण

परिवार के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली शकुंतला को कभी सम्मान नहीं मिला. लेकिन नृत्य के प्रति उसका समर्पण उसे अपनी पहचान और सम्मान दिलाता है.

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मीरा तुम कहाँ हो? एक अधूरी दोस्ती और आदिवासी लड़की के संघर्ष की मार्मिक कहानी

मीरा तुम कहाँ हो

तीन दशक पहले मिली एक आदिवासी लड़की मीरा, जो पढ़ाई में बेहद होशियार थी और जीवन में आगे बढ़ना चाहती थी। लेकिन परिस्थितियों ने उसकी राह रोक दी। वर्षों बाद हुई एक मुलाकात ने दोस्ती, सपनों और बिछड़ने की ऐसी कहानी छोड़ दी, जिसका सवाल आज भी कायम है मीरा तुम कहाँ हो?

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साहित्य पुरस्कार प्राप्त करती मुस्कुराती महिला, जिसके चेहरे पर संघर्ष से मिली सफलता की चमक है।

अव्वल दर्जे की बेवकूफ़

बार-बार ‘अव्वल दर्जे की बेवकूफ़’ कहकर अपमानित की गई सीमा ने हार नहीं मानी। धैर्य, संघर्ष और अपनी लेखनी के बल पर उसने न केवल अपनी पहचान बनाई, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी जीत भी हासिल की। यह एक संवेदनशील और प्रेरक हिंदी कहानी है।

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अपने अधूरे सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष करती एक भारतीय महिला का भावनात्मक दृश्य

उसने छोड़े नहीं थे, बस छिपा लिए थे सपने

कुछ लड़कियाँ अपने सपने छोड़ती नहीं, बस वक्त और जिम्मेदारियों के नीचे छिपा देती हैं। यह कहानी एक ऐसी ही लड़की की है, जिसने परिस्थितियों से समझौता किया, लेकिन अपने भीतर की पहचान को कभी मरने नहीं दिया।

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अपनी बेटी का हाथ थामे आत्मविश्वास से आगे बढ़ती माँ, नए शहर की पृष्ठभूमि में उगता सूरज

मुक्ति की उड़ान…

“मुक्ति की उड़ान” एक सशक्त कहानी है जो दर्शाती है कि जब एक माँ अपने आत्मसम्मान और बेटी के भविष्य के लिए खड़ी होती है, तो वह समाज की हर रूढ़ि को तोड़ सकती है। यह कहानी नारी साहस, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है।

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स्त्री जीवन और संघर्ष को दर्शाती कविता “हम सपने देख रहे हैं”

हम सपने देख रहे हैं….

“हम सपने देख रहे हैं” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो स्त्री के जीवन, त्याग, श्रम, घरेलू और सामाजिक संघर्ष को रोटी के प्रतीक के माध्यम से गहराई से अभिव्यक्त करती है।

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नारी द्वारा नारीत्व का परित्याग

समाज में नारी की भूमिका और नारीत्व आज गंभीर परिवर्तन का सामना कर रहा है। जहाँ सदियों से नारी को ममता, कोमलता और जीवन देने वाले स्वरूप के रूप में देखा गया, वहीं अब वही नारी कई परिस्थितियों में अत्याचार, विषाक्त जीवन और अन्याय के खिलाफ प्रचंड स्वरूप धारण कर रही है।

कई मामलों में नारी अपने बच्चों या परिवार के प्रति परंपरागत ममता के बजाय अपने जीवन के बंधनों से मुक्त होने का प्रयास करती है। यह कदम कभी-कभी उस विषाक्त वातावरण का प्रतिरोध होता है, जो उसे हर दिन मानसिक और शारीरिक रूप से चोट पहुँचाता है।

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