आसान नहीं है पुरुष होना…
पुरुष होना कई मायनों में सरल नहीं। दुनिया उन्हें मजबूत देखना चाहती है, मगर दर्द छुपाने की कला में वे अक्सर अकेले पड़ जाते हैं। हम लड़कियाँ आँसू पोंछने को काजल-लाइनर का सहारा ले लेती हैं, मुस्कान को लिपस्टिक से गहरा कर देती हैं। पर पुरुष? वे रोते भी कम हैं और जब रोते हैं तो छुपाने की सुविधा भी कहाँ होती है उनके पास।
