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मां आदिशक्ति

यह कविता मां भवानी की आराधना और शक्ति की महिमा का उत्सव है। कवि मां को आदिशक्ति के रूप में पूजता है और उनके चरणों में शरण पाने की इच्छा व्यक्त करता है। कविता में यह दर्शाया गया है कि श्रद्धा और भक्ति से मां सभी संकटों को दूर करती हैं और जीवन में मंगल लाती हैं।
कन्या रूप में विराजित शक्ति, उनके चरणों से सुख-शांति और सामर्थ्य प्रदान करती है। दुर्गा अष्टमी जैसे पर्वों के माध्यम से मां का आशीर्वाद प्राप्त करने का महत्व भी उजागर किया गया है। कुल मिलाकर, यह कविता भक्ति, शक्ति, संरक्षण और आशीर्वाद का संदेश देती है।

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