परीक्षा केंद्र के बाहर प्रवेश पत्र और किताबें हाथ में लिए शांतिपूर्वक बैठे भारतीय विद्यार्थी, जिनके चेहरों पर टूटे सपनों, संघर्ष, निराशा और न्याय की उम्मीद साफ़ दिखाई दे रही है। यह दृश्य पेपर लीक से प्रभावित युवाओं की पीड़ा और बेहतर भविष्य की उनकी आशा का प्रतीक है।

सपनों का टूटना

‘सपनों का टूटना’ एक मार्मिक सामाजिक कविता है, जो पेपर लीक, युवाओं के संघर्ष, बेरोजगारी, अन्याय और टूटती उम्मीदों की दर्दनाक सच्चाई को उजागर करती है। कविता उन लाखों विद्यार्थियों की पीड़ा को स्वर देती है, जिनकी वर्षों की मेहनत भ्रष्ट व्यवस्था के कारण प्रभावित होती है। यह रचना केवल आक्रोश नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज़ उठाने और बदलाव की उम्मीद का भी संदेश देती है।

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"दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग और सोनम वांगचुक के अनशन का प्रतीकात्मक दृश्य।"

एक इस्तीफ़ा अगर हो भी जाता तो क्या होता

नीट 2026 प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग, सोनम वांगचुक के आमरण अनशन और सरकार के रुख के बहाने यह लेख लोकतंत्र, नैतिक जवाबदेही और जनआन्दोलनों की प्रासंगिकता पर गंभीर प्रश्न उठाता है। क्या जनता की आवाज़ सुनना सरकार की मजबूती का संकेत नहीं हो सकता?

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परीक्षा हॉल में चिंतित छात्र, NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता दृश्य।

नीट पेपर लीक : जिम्मेदार कौन?

NEET पेपर लीक केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के सपनों और विश्वास पर गहरा आघात है। वर्षों की मेहनत, परिवारों के त्याग और युवाओं के संघर्ष के बाद जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, तो केवल परीक्षा नहीं टूटती, बल्कि पूरा भरोसा बिखर जाता है। अब समय आ गया है कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय हो, दोषियों को कठोर सजा मिले और ऐसी पारदर्शी प्रणाली बनाई जाए जहाँ मेहनत का मूल्य पैसों और पहुंच से अधिक हो।

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