gulmohar

अम्माजी…

जयपुर में किराये के घर के नीचे रहने वाली 80-85 साल की अम्माजी ने मुझे दोस्त बना लिया था। हिसाब-किताब में पक्की, आवाज़ में रौब — और उम्र में अद्भुत ताक़त। बेटियाँ पास थीं, बेटा विदेश में पर उनके मन में सबसे बड़ी खाली जगह बेटे ने ही छोड़ी थी। वह मुझे बहाने से बुलातीं, गाने सुनातीं, और कहतीं “बात कर लिया करो, अच्छा लगता है।”
दिवाली से ठीक पहले वह बाथरूम में गिर गईं। ऑपरेशन हुआ। बेटियाँ दौड़-भाग में, और एक्सरसाइज़ मेरा काम। irritation भी होती थी, पर उनसे मोह भी हो गया।

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