शब्दों का आचरण
यह लघुकथा ज्ञान और आचरण के अंतर को उजागर करती है। जो ऋषि संसार को करुणा का उपदेश देता है, वही अपने घर में उसे जी नहीं पाता। अंततः शब्दों की खोखली चमक टूटती है और सच्चे आत्मबोध का जन्म होता है पर एक अपूरणीय क्षति के साथ।

यह लघुकथा ज्ञान और आचरण के अंतर को उजागर करती है। जो ऋषि संसार को करुणा का उपदेश देता है, वही अपने घर में उसे जी नहीं पाता। अंततः शब्दों की खोखली चमक टूटती है और सच्चे आत्मबोध का जन्म होता है पर एक अपूरणीय क्षति के साथ।