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स्कूल के दिनों के मासूम प्यार और बचपन की यादों पर आधारित भावनात्मक हिंदी कहानी

वो टिफ़िन,अचार और तुम….

हर प्रेम कहानी का अंत मिलन नहीं होता। कुछ प्रेम कहानियाँ केवल यादों में जीवित रहती हैं। अनिरुद्ध और काव्या की यह भावनात्मक कहानी बचपन की मासूम दोस्ती, अनकहे प्रेम और उन मीठी स्मृतियों को सहेजती है, जो उम्रभर दिल में मुस्कुराती रहती हैं।

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1994 के एक भारतीय मोहल्ले की छत पर खड़ी एक किशोर लड़की हाथ में छोटी-सी चिट्ठी लिए शर्माते हुए सामने की छत पर खड़े एक लड़के की ओर देख रही है। दोनों छतों पर सूखते कपड़े, पानी की टंकी और दूरदर्शन के पुराने एंटीना दिखाई दे रहे हैं। ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी पूरे दृश्य को मासूम पहली मोहब्बत और पुरानी यादों के भाव से भर रही है।

छत वाला प्रेम

सन् 1994 का वह दौर, जब प्रेम के पास न मोबाइल था, न सोशल मीडिया। बस शाम की छतें, तिरछी निगाहें, पत्थर में बंधी चिट्ठियाँ और एक अधूरी मोहब्बत, जो बरसों बाद भी यादों की छत पर जाड़े की धूप बनकर ठहरी रहती है।

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अपने बचपन के प्रेम और पुरानी यादों में खोई एक युवती, धूप भरे माहौल में पुराने घर की ओर भावुक नज़रों से देखते हुए।

सब कुछ याद है मुझे

विजया डालमिया, हैदराबाद वो हमारा दीवानापन थाया बचपन की मोहब्बत,जिसे दोस्ती का नाम देकरकरते थे हर पल शरारत। बड़े होने पर भीसब कुछ याद है मुझे…. छोटी-छोटी ज़िद, छोटी-छोटी तकरार,देती थी लंबी-सी खुशी।वो तपती धूप मेंएकटक उसके घर की ओर ताकते रहना,उसकी एक झलक पाने के लिए। पैरों में पड़े फफोलों को देखकरउसका मुझे डाँटना,और…

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एक युवती पुराने पोस्टकार्ड को हाथ में लेकर भावुक होती हुई, अपने पहले प्यार और यादों में खोई हुई।

पहला प्यार

एक साधारण-सा पोस्टकार्ड, जो जीवन के पहले प्यार की सबसे अनमोल निशानी बन जाता है। यह लघुकथा यादों और भावनाओं के उस कोमल संसार में ले जाती है, जहाँ पहला प्रेम कभी भुलाया नहीं जा सकता।

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