Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

लोहड़ी

“लोहड़ी” लघुकथा में प्रेम, मानवता और त्यौहार का सुंदर संगम है। बहु के प्रेम और समझ से सासू माँ का दिल बदलता है, और पर्व स्नेह का प्रतीक बन जाता है।

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“कोमल नहीं, मजबूत है कलाई”

स्त्री केवल कोमल नहीं, बल्कि परिवार और समाज की धुरी है। संस्कार, व्रत, उपवास और साधना के माध्यम से वह न केवल अपने भीतर शक्ति और संयम विकसित करती है, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में बाँधती है। यह कविता स्त्री की आंतरिक ऊर्जा, परंपरा और सशक्तिकरण को उजागर करती है।

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