संस्कार या सत्ता
यह कहानी बताती है कि कैसे युवा अपने संस्कारों और जीवन मूल्यों के बीच फंस जाते हैं और Diplomacy की दुनिया में कदम रखते ही उन्हें अप्रत्याशित परिणामों का सामना करना पड़ता है

यह कहानी बताती है कि कैसे युवा अपने संस्कारों और जीवन मूल्यों के बीच फंस जाते हैं और Diplomacy की दुनिया में कदम रखते ही उन्हें अप्रत्याशित परिणामों का सामना करना पड़ता है
दिल्ली से पटना की बारह घंटे की रेल यात्रा में पनपा किशोर प्रेम समाज और संस्कारों की दीवार से टकराकर दबा दिया जाता है, पर उसका मीठा दर्द शेफाली के जीवन भर उसके साथ रहता है।