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जीवन चक्र और अंतिम विदाई

50 वर्षों का साथ, सुख-दुख की साझेदारी और परिवार की खुशियाँ — सब एक क्षण में बदल जाती हैं जब जीवन साथी इस संसार से विदा हो जाता है। यह अनुभव अकेलेपन, स्मृतियों और जीवन के चक्र की गहनता को सामने लाता है। इस लेख में हम एक पति के दृष्टिकोण से उस अंतिम विदाई और जीवन के अनुभवों की झलकियाँ साझा कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक परिवार और बच्चों के लिए समर्पण किया।

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चन्दन की चांदनी

चांदनी का यह पहला करवा चौथ था, लेकिन उसका पति चन्दन उसके साथ नहीं था। शादी को अभी साल भी पूरा नहीं हुआ था और चंदन को हेड ऑफिस के बुलावे पर अपनी ड्यूटी पर जाना पड़ा। उदास चांदनी को सासुमा ने प्यार से समझा-बुझाकर नई लाल सिल्क साड़ी और गहने दिलवाए।
जब चांद निकला, चांदनी ने छलनी से उसे देखा और अपने पति की याद में मनुहार की। तभी सही वक्त पर वीडियो कॉल आया — चंदन मुस्कुराते हुए सामने था। खुशी और प्यार से भरी यह पल सभी सुहागिनों के लिए भी आनंदमय था। सासू मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “इन्हें किसी की नज़र न लगे, इनके बीच अटूट प्यार बना रहे।”

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