हलफनामा

पुरुष ने बड़ी कुशलता से मिट्टी और स्त्री में बीज बोने के अधिकार अपने अधीन कर लिए। उसने सब कुछ नियंत्रित किया, जिसमें स्त्री के मस्तिष्क का एक छोटा सा कोना भी शामिल था। दिखावे की रंगीन दुनिया में उसने बड़ी सफाई से अपना भार स्त्री के कंधे पर डाल दिया।

अब, जब स्त्रियों ने पुरुष सत्ता-कमान को कुशलता से संभाल लिया है, पुरुष तुरंत नए आदर्श स्थापित करने में जुट गया। अपराध भाव और जकड़न की स्थिति में विद्रोह की लौ को स्त्रियों ने सहजता से दबा दिया। यह धीरे-धीरे एक नए हलफनामे में तब्दील हो रहा है, जो बदलाव और संतुलन की दिशा में संकेत देता है।

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कमला का द्वंद

कमला की कहानी उस हर औरत की दास्तान है जो समाज की रूढ़ियों, अपेक्षाओं और तानों के बीच अपनी पहचान खो बैठती है। सुंदरता, प्यार और त्याग के बावजूद वह केवल “बेटियों की माँ” कहलाकर अपमानित हुई। पति के छोड़ जाने के बाद भी उसने बेटियों की परवरिश अकेले की और जीवन भर सुहागन और विधवा के बीच के द्वंद में पिसती रही। यह कथा समाज की विडंबना को उजागर करती है—जहाँ स्त्री को उसके अस्तित्व से नहीं, बल्कि समाज की बनाई कसौटियों से आँका जाता है।

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