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अपने अस्तित्व और भावनाओं को समझती एक महिला

तुम वही हो?

प्रेम के अभाव से मिलन की उत्कंठा तक और सपनों से आत्मपहचान तक, ‘तुम वही हो?’ मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक संसार को शब्द देती एक संवेदनशील कविता है।

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