A lone Indian devotee performing dandavat parikrama on a forest path under full moonlight near Giriraj Hill, surrounded by calm nature, reflecting devotion, surrender, divine protection, and spiritual peace.

प्रेम, परिक्रमा और प्रसाद : जंगल में प्रभु की लीला

गिरिराज जी की दंडवती परिक्रमा केवल यात्रा नहीं, बल्कि समर्पण और कृपा का साक्षात अनुभव है। एकाकी पथिकों से भेंट, अस्वस्थता में प्रभु की सहायता, अजनबी हाथों से मिला प्रसाद, जंगल में जल-अन्न और रात्रि की पूर्णिमा में गिरिराज का सान्निध्य हर क्षण यह अनुभूति देता है कि जहाँ विश्वास है, वहाँ प्रभु स्वयं मार्गदर्शक बन जाते हैं।

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प्रयागराज: जहाँ जल भी मोक्ष का द्वार बनता है

प्रयागराज—तीर्थों का राजा, जहाँ गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का त्रिवेणी संगम आत्मा को छू लेने वाला अनुभव बन जाता है। यह केवल नदियों का मिलन नहीं, श्रद्धा और सनातन परंपरा की धारा है। संगम में एक डुबकी, जीवन के सभी द्वंद्वों से मुक्ति और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है। नाव की धीमी चाल, मंत्रों की गूंज और जल पर तैरते दीप—यह एक ऐसी यात्रा है, जो हृदय को भीतर तक शांत कर देती है।

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