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…खटकने लगोगे

यह रचना उस क्षण की सच्चाई बयान करती है जब व्यक्ति दूसरों की अपेक्षाओं से बाहर निकलकर अपनी राह चुनता है। जैसे ही कोई अपने सपनों, अपनी आवाज़ और अपने आत्मसम्मान के लिए खड़ा होता है, वही समाज उसे चुभने वाला मानने लगता है। लेख जीवन की कमान अपने हाथ में रखने और स्वार्थी दुनिया की पहचान करने की सशक्त सीख देता है।

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