जज़्बातों का मेला है ज़िंदगी
ज़िंदगी कोई साधारण चीज़ नहीं, यह भावनाओं, यादों, रिश्तों और एहसासों का कुल योग है। यह क़ीमती भी है, तकलीफ़देह भी है, लेकिन हर पल हमारे बहुत पास है।

ज़िंदगी कोई साधारण चीज़ नहीं, यह भावनाओं, यादों, रिश्तों और एहसासों का कुल योग है। यह क़ीमती भी है, तकलीफ़देह भी है, लेकिन हर पल हमारे बहुत पास है।
ज़िंदगी भी एक ट्रेन की तरह है — जो धीरे-धीरे रफ़्तार पकड़ते हुए हमें आगे ले जाती है। हर पड़ाव पर कुछ न कुछ पीछे छूट जाता है — कोई शहर, कोई गलियां, कुछ अपने लोग। लेकिन जो सच में हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके होते हैं, वे कभी पूरी तरह नहीं छूटते। वे ठहरे रहते हैं — हमारी यादों में, हमारी भावनाओं में, और उस अगली मुलाक़ात की उम्मीद में, जैसे स्टेशन पर खड़े वे लोग जो ट्रेन गुज़र जाने के बाद भी कुछ देर तक हाथ हिलाते रहते हैं… यादें, उदासी और इंतज़ार लिए।
ज़िंदगी तन्हा लगती है जब तक कोई साथी नहीं होता। चाहे कितनी भी भक्ति कर लो या चारों ओर दुनिया की दौड़-धूप हो, दिल को सुकून केवल किसी प्रिय के साथ से मिलता है। तन्हाई चारों ओर हो तो हर खुशी अधूरी लगती है, और सिर्फ एक साथी के होने से ही जीवन में हल्की मुस्कान और राहत महसूस होती है। जीवन की सच्ची सुंदरता तब उजागर होती है जब कोई पास हो, बातों में मुस्कान बिखेरता हो और हर ग़म को कम कर देता हो। यही सरल, पर अनमोल एहसास है — एक साथी का होना ही जीवन को पूरा बनाता है।