एक शरारत हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई
कभी क्रिकेट के मैदान में अपनी स्पिन गेंदों से दोस्तों को छेड़ने वाला, तो कभी अपनी हँसी और शरारतों से हर महफ़िल को जीवंत बना देने वाला गिरधारी अरोरा अब सिर्फ़ यादों में बस गया है। कॉलेज के दिनों की दोस्ती, जनता एक्सप्रेस के सफ़र, महिदपुर रोड की गलियाँ और अनगिनत शरारतें आज भी दिल में ज़िंदा हैं। यह संस्मरण एक ऐसे दोस्त को श्रद्धांजलि है, जिसके जाने से यादों का एक पूरा दौर हमेशा के लिए ख़ामोश हो गया।
