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गाँव के पुराने घर में दादू और पोते के भावुक मिलन का दृश्य

ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं

दादू की आँखों में वर्षों से पल रहे इंतज़ार को जब पोता समझता है, तो रिश्तों, मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ने की एक भावुक कहानी सामने आती है.

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पुश्तैनी घर के आँगन में लौटता रवि और ख़ामोश दीवारें

ख़ामोश घर की दीवारें फुसफुसाती हैं

बरसों से सूना पड़ा पुश्तैनी घर आज भी अपने लोगों की आहट का इंतज़ार कर रहा है। रवि जब लौटता है, तो दीवारें, चूल्हा, गुलमोहर और आँगन की तुलसी उसे बीते रिश्तों और यादों की कहानी सुनाते हैं।

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