खतों की खुशबू कहाँ जाती है…
खतों का वह दौर, जब शब्दों में रिश्तों की गर्माहट और इंतजार की मिठास बसी होती थी. ‘चलो, आज हम फिर से खत लिखते हैं’ पुराने खतों, प्रेम और यादों की उसी खूबसूरत दुनिया को फिर से महसूस कराने वाली कविता है.

खतों का वह दौर, जब शब्दों में रिश्तों की गर्माहट और इंतजार की मिठास बसी होती थी. ‘चलो, आज हम फिर से खत लिखते हैं’ पुराने खतों, प्रेम और यादों की उसी खूबसूरत दुनिया को फिर से महसूस कराने वाली कविता है.