gulmohar
मोरपंख मुकुट धारण किए बाँसुरी बजाते श्रीकृष्ण का भक्ति भाव से भरा दृश्य

कान्हा तेरी पगड़ी की मोर पांखड़ी बन जाऊँ

कान्हा के प्रति प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति करती यह भक्ति कविता मोरपंख से लेकर बाँसुरी, पायल और चरणों की धूल बनने की भावपूर्ण कल्पना के माध्यम से कृष्ण-भक्ति को व्यक्त करती है.

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