मां की आराधना में नारी

यह कविता नारी के महत्व, उसकी शक्ति और समाज में उसके सम्मान की आवश्यकता पर केंद्रित है। लाल चुनरी से सजा माँ का दरबार और नौ दिन की पूजा नारी की भक्ति और महिमा को दर्शाते हैं। कविता यह बताती है कि सृष्टि नारी के बिना नहीं चलती और जहाँ नारी का अपमान होता है, वहाँ पूजा-पाठ व्यर्थ है। विता में यह संदेश भी है कि नारी को कभी कमजोर नहीं बनना चाहिए। यदि उसके आत्म-सम्मान पर चोट पहुँचती है, तो उसे काली या चंडी के रूप में दुष्टों का विनाश करना चाहिए। साथ ही यह भी उजागर किया गया है कि आज भी कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियाँ जारी हैं और बेटियों की सुरक्षा समाज के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, यह कविता नारी सम्मान, शक्ति, साहस और जागरूकता का संदेश देती है।

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मासूम सपने

अष्टमी के दिन गिन्नी और सक्षम को खेलने का मौका मिला। गिन्नी की विधवा माँ चाची की मदद में व्यस्त थीं, इसलिए बच्चों को थोड़ी आज़ादी मिली। सक्षम बड़े मासूम अंदाज़ में गिन्नी से पूछता है कि वह रोज उसके साथ क्यों नहीं खेलती। गिन्नी बताती है कि उसे पढ़ाई करनी है, क्योंकि माँ कहती हैं कि लड़कियाँ ज्यादा नहीं पढ़तीं, उन्हें घर के कामों के लिए तैयार रहना चाहिए।

सक्षम चाहता है कि वह भी अपने पापा को ढूँढे और घर वापस लाए, लेकिन गिन्नी उसे समझाती है कि ऊपर आकाश में सब लोग गुम हो जाते हैं। दोनों भाई-बहन अपने छोटे-छोटे सपनों और मासूम बातचीत में उलझे हुए हैं। चाची की चीखती आवाज उन्हें जगाती है, और गिन्नी की आँखों में चमकते सपने कुछ पल में बिखर जाते हैं। यह कहानी बच्चों की मासूमियत और उनके भीतर की संवेदनशीलता को दर्शाती है।

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