Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
खिड़की के पास अकेली बैठी एक भारतीय महिला, चेहरे पर गहरी उदासी और आंखों में छलकता दर्द. कमरे में हल्की रोशनी और पृष्ठभूमि में धुंधली होती एक पुरुष आकृति, जो दूरी और रिश्ते के टूटने का प्रतीक है. दृश्य भावनात्मक पीड़ा, विश्वासघात और मानसिक अकेलेपन को यथार्थ रूप में दर्शाता है.

कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं

कुछ पुरुष रिश्ते बड़ी आसानी से बनाते हैं और उतनी ही सहजता से तोड़ भी देते हैं. बिना किसी स्पष्टीकरण, बिना किसी टकराव के वे चुप्पी को हथियार बनाकर स्त्री को खुद ही रिश्ते से बाहर निकलने को विवश कर देते हैं. यह लेख उसी मौन छल, टूटते विश्वास और उस स्त्री की मानसिक पीड़ा की कहानी है, जो प्रेम को ईश्वर मान बैठती है और अंत में स्वयं को ठगा हुआ पाती है.

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