चुप्पी में दर्ज एक स्त्री

स्त्री के उस अनकहे इतिहास की साक्षी है, जिसे वह नीले निशानों, झुकी आँखों और मौन सहमति के बीच ढोती रहती है। पिता से पति तक, देह से धर्म तक, वह हर भूमिका निभाती हुई अपनी इच्छाओं को अवर्जित कर देती है। अहिल्या, द्रौपदी, उर्मिला और सीता की तरह वह सदियों से अग्नि-परीक्षाओं में झोंकी जाती है फिर भी सृजन करती है, सहती है और अंत तक एक अभेद रहस्य बनी रहती है

Read More

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

श्रीराम को केवल एक राजा या नायक के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श और जीवन-दर्शन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जिनमें मन रमा रहे, जिन्हें हमने कभी गुना नहीं, जो समय के शिलालेख पर पावन धाम हैं — वही राम हैं। उनकी मर्यादित कर्त्तव्य-बोध और कूटनीति की सूक्ष्म समझ, जीवन के रण में उनकी जीत और हार, सागर पर उनका साहस, प्रेम और त्याग — सब उन्हें न केवल नायक बल्कि नयनाभिराम बनाते हैं। उनके कार्य और आचरण हमारे जीवन में संजीवनी और अनमोल निधि की तरह हैं।

Read More

अब अहिल्या को राम नहीं मिलते…

पुलिस की रेड पड़ी और इस बार वह पकड़ी गई। थाने में महिला पुलिस फटकार लगा रही थी—”शर्म नहीं आती तुम्हें शरीर बेचते हुए? तुम औरत के नाम पर कलंक हो!” वह सिर नीचा किए सुनती रही। सुन-सुनकर पत्थर हो गई। यह लताड़ पहली बार नहीं पड़ी थी, न जाने कितनी बार लोगों ने उसकी औक़ात उसे दिखाई है। वह यह भी जानती है कि दिन में औक़ात दिखाने वाले, रात में उसके दरवाज़े पर खड़े रहते हैं।

Read More