काश तुम मेरी खामोशी पढ़ पाते…
कुछ प्रेम कहानियाँ इसलिए अधूरी नहीं रह जातीं कि उनमें प्यार कम होता है, बल्कि इसलिए कि एक दिल बोल नहीं पाता और दूसरा उसकी खामोशी सुन नहीं पाता।

कुछ प्रेम कहानियाँ इसलिए अधूरी नहीं रह जातीं कि उनमें प्यार कम होता है, बल्कि इसलिए कि एक दिल बोल नहीं पाता और दूसरा उसकी खामोशी सुन नहीं पाता।
विजया डालमिया, हैदराबाद ‘साथ हो तुम मेरे’ कनिका की कहानी है, जिसे प्रेम मिला तो सही, लेकिन स्वीकार नहीं मिला। सांवले रंग को लेकर मिले अस्वीकार ने उसे भीतर तक तोड़ दिया, मगर उसने अपने प्रेम को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। कपिल उसके जीवन में साथ होकर भी साथ नहीं था, फिर भी उसकी…
सन् 1994 का वह दौर, जब प्रेम के पास न मोबाइल था, न सोशल मीडिया। बस शाम की छतें, तिरछी निगाहें, पत्थर में बंधी चिट्ठियाँ और एक अधूरी मोहब्बत, जो बरसों बाद भी यादों की छत पर जाड़े की धूप बनकर ठहरी रहती है।
यह कविता कृष्ण और राधा के अधूरे मिलन और आधे गीत की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि अपने मन में बंसी की तान सुनते हुए राधा जैसा जीवन जीने की चाहत व्यक्त करता है। अधूरी आकांक्षाएँ, जंजीरों को तोड़कर आज़ादी पाने की तड़प, और पुनर्जन्म में फिर से कृष्ण को देखने की प्रार्थना कविता के भावों को गहरा और मार्मिक बनाती है। यह कविता प्रेम, विरह और आधे जीवन की अधूरी तृप्ति को दर्शाती है।