वसंत का संगीत
यह कविता बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती माता के आशीर्वाद, प्रकृति के बदलते रंग और ऋतुओं के मिलन को उजागर करती है। वसंत के आगमन से जीवन में उमंग और विद्या की महत्ता का सुंदर चित्रण।

यह कविता बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती माता के आशीर्वाद, प्रकृति के बदलते रंग और ऋतुओं के मिलन को उजागर करती है। वसंत के आगमन से जीवन में उमंग और विद्या की महत्ता का सुंदर चित्रण।
यह कविता शीत ऋतु के सजीव और मानवीय चित्रण को प्रस्तुत करती है, जहाँ सूरज भी रजाई ओढ़े प्रतीत होता है. ठंडी हवाएँ, पहाड़ों की बर्फ, अलाव की गर्माहट, तिल-गुड़ की सोंधी खुशबू और धूप की कोमल मुस्कान मिलकर सर्द मौसम का एक जीवंत, आत्मीय और सौंदर्यपूर्ण दृश्य रचती हैं.
संत पवन के आगमन से मन का मधुबन महक उठा है कलियों की आँखें खुलीं, भंवर गूंजे, तितलियाँ थिरकीं और कोकिला के गीतों से आँगन भर गया। पतझड़ की थकान भूलकर प्रकृति फिर से उत्सव में ढल गई।
बीज से अंकुरित होकर वृक्ष बनना सिर्फ़ बढ़ना नहीं
यह धूप, बारिश, तूफ़ान और समय का कठोर परीक्षण है। अहंकारी डालियाँ टूट जाती हैं, घमंडी पत्ते उड़ जाते हैं, पर जड़ों वाला पुराना वृक्ष अडिग खड़ा रहता है। उसी की छाँव में नई कोंपलें जन्म लेती हैं मजबूत, विनम्र, और जीवन का नया सबक लिए हुए।