gulmohar

भय

“अब का भूल जाओ सब और अपनी छोटी बेटी पर ध्यान दो” — कहकर मातादीन छोटे ठाकुर की गाड़ी चलाने चला गया। राधा की मौत से टूटा, मगर डर से बंधा बाप अपने आंसू निगल गया। ये सिर्फ़ एक बेटी की कहानी नहीं, पूरे सिस्टम की चुप्पी की चीख़ है, जहां ज़िंदगी से ज्यादा बड़ी होती है रोटी की मजबूरी और डर।

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कैक्टस

वो कभी तन्हा न लगता है, गमले में भी कितना ख़ुश रहता है… कैक्टस की तरह जो जीवन की हर सख़्ती में भी मुस्कुराता है। न धूप की शिकायत, न छाँव की उम्मीद—बस अपनी मौजूदगी में जीता हुआ एक प्रतीक उम्मीद का।

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गांव के आंगन में एक लड़की चाय का कप पकड़े, सामने भावुक खड़ा एक युवक, हल्की धूप और भावनात्मक माहौल

अधूरी चाय, अधूरा इश्क़

चाय को ना नहीं बोलते साहब, पाप लगता है…” — और इस मासूम से वाक्य ने मोहित की ज़िंदगी की दिशा ही बदल दी। वर्षों बाद जब वही चाय की खुशबू और वही बात एक नन्हीं बच्ची ने दोहराई, तो अधूरी कहानी को एक नया अंत मिल गया।

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बूंदों के नूपुर

अम्बर चमके दामिनी, रिमझिम पड़े फुहार, सोंधी माटी की महक से भीगता देहात, सावन की झूले झूलती सखियाँ, बादलों संग गूंजता बूंदों का संगीत — यह कविता मानसून के सौंदर्य, ग्रामीण जीवन के उल्लास और प्रकृति की रूमानी छवि को भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करती है।

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परदों के रंग से बदलें घर का भाग्य

वास्तु शास्त्र में जैसे दिशाओं का महत्व है, वैसे ही रंगों की भी विशेष भूमिका होती है. हमारे घर की बनावट, साज-सज्जा और रंग संयोजन सिर्फ सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि हमारे जीवन में मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द भी लाते हैं. घर के दरवाजे-खिड़कियों पर लगाए जाने वाले परदों का रंग वास्तु की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. आइए जानें कि किस दिशा और व्यक्ति के लिए कौन सा रंग शुभ माना गया है और क्यों.

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आधुनिक समाज के दिखावे और बाहरी चमक में खोते मानवीय मूल्यों को दर्शाती प्रतीकात्मक कलात्मक छवि।

दोगले दिखावे में डूबी सभ्यता

यह कविता आधुनिक समाज के दिखावे, दोगलेपन और खोते मानवीय सलीके पर सवाल उठाती है। बाहरी चमक और भाषा के आडंबर में दबते चरित्र और विचारों की मार्मिक तस्वीर प्रस्तुत करती है।

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सूर्य को अर्घ्य देने से मिलते हैं स्वास्थ्य, यश और सफलता

सूर्य केवल प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि वह हमारे जीवन के स्वास्थ्य, सफलता, यश और राज्य पद का भी कारण है। नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देने से न केवल नौ ग्रह अनुकूल होते हैं, बल्कि जीवन की बड़ी से बड़ी समस्याएं भी हल होती चली जाती हैं। जानिए सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि, विशेष उद्देश्य अनुसार उपाय और जरूरी सावधानियां।

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जिसके सिर पर छांव नहीं थी… वो खुद सूरज बन गया”

फादर्स डे पर बच्चों ने मुझे बधाई दी, लेकिन मैं अपने पिता को कभी ‘हैप्पी फादर्स डे’ नहीं कह पाया। क्योंकि वो होते हुए भी कभी पिता जैसे नहीं रहे। ठोकरें लगीं, खुद ही संभला, खुद ही सीखा… शायद इसी में ज़िंदगी की असली सीख थी।”

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father teaching math to child with broken pens and nervous expressions, funny childhood memory scene

पिता और पढ़ाई

पिता और पढ़ाई का रिश्ता जीवन भर का एक अद्वितीय अनुभव है, जिसमें कभी प्रेम, कभी भय, और कभी हँसी का मिश्रण होता है। एक गणित अध्यापक पिता का अपने बच्चों को पढ़ाने का अंदाज़, उनके पेन खोजने की आदतें, और ‘लाभ-हानि’ के दो थप्पड़ों की यादें, यह सब मिलकर एक घरेलू, आत्मीय और हास्य-व्यंग्य से भरी स्मृति बन जाते हैं। यह संस्मरण न सिर्फ एक पिता की जटिलताओं को दिखाता है, बल्कि उनके भीतर छिपे प्रेम, अनुशासन और अनोखी सोच को भी उजागर करता है

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मेरे पापा – मेरी ताक़त”

“जब दुनिया ने मुँह मोड़ा, राहें सब सूनी थीं,
पापा के आँगन में उम्मीदें बस जीती थीं।
हर हार में उन्होंने मुझे मुस्कराना सिखाया,
हर गिरने पर खुद उठकर चलना सिखाया।
पापा — आप मेरे भगवान हैं इस ज़मीं पर,
आपके बिना ये जीवन अधूरा सा है हर पल।”

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