gulmohar

उज्जैन फिर उज्जयिनी हो जाए

उज्जैन को उज्जयिनी नाम से फिर पहचान दिलाने का प्रयास चल रहा है — एक ऐसी नगरी जो विक्रमादित्य की राजधानी रही, कालिदास और भर्तृहरि की कर्मभूमि रही और जिसे साहित्य, ज्योतिष, संस्कृति और खगोल-विज्ञान की जन्मस्थली माना गया। पंडित सूर्य नारायण व्यास ने विक्रमादित्य की विरासत और उज्जयिनी के गौरव को पुनर्स्थापित करने में महती भूमिका निभाई। आज उज्जैन धार्मिक पर्यटन का केंद्र तो बन गया है, लेकिन उस उज्जयिनी का साहित्यिक, सांस्कृतिक वैभव खोता जा रहा है। अब समय है कि उज्जयिनी को उसका प्राचीन गौरव फिर से मिले — नाम से, संवत् से और सांस्कृतिक पहचान से।

Read More

शरीर को स्वस्थ, मन को निर्मल बनाता है योग

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मचिंतन और संतुलित जीवन का माध्यम है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और बेचैनी से मुक्ति का सरल, सस्ता और प्रभावी उपाय है योग। यह न सिर्फ शरीर को सशक्त करता है बल्कि मन को भी स्थिरता, ऊर्जा और सकारात्मकता से भर देता है। योग वह शक्ति है जो जीवन को दिशा, उद्देश्य और संतुलन प्रदान करती है।

Read More

‘मन निर्मोही’

स्वाभिमान की चोट से आहत मन ने पहले सहजता से सहा, फिर आक्रोशित होकर न्याय की उम्मीद में संघर्ष किया। विश्वविद्यालय और सचिवालय की सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते उसने सच्चाई के दबे-सिसकते स्वर को देखा। छल और प्रपंच के बीच भी उसने सिद्धांतों को नहीं छोड़ा। परंतु जब न्यायालय की प्रक्रिया भी ठंडी पड़ी मिली, तो अंततः मन निर्मोही हो गया।

Read More

टैरो कार्ड्स: भविष्य नहीं, आत्म-खोज की एक यात्रा

“टैरो कार्ड्स अब केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे भीतर के मौन से संवाद करने का एक सशक्त साधन हैं। ये प्रतीकात्मक चित्र हमारे मन की परतों को खोलते हैं, और हमें खुद से जुड़ने का अवसर देते हैं।”

Read More

पास होकर भी दूर: दो दिलों की ख़ामोश मोहब्बत

“कुछ रिश्ते होते हैं, जो बिना नाम के भी ज़िंदा रहते हैं। न वे समाज से मान्यता चाहते हैं, न किसी वादे की ज़रूरत होती है। बस एक मौन जुड़ाव होता है—जिसमें न कोई अधिकार होता है, न अपेक्षा। चितरा और सत्य का रिश्ता भी कुछ ऐसा ही था—जहां भावनाएं थीं, गहराई थी, पर कोई दावा नहीं था। यह प्यार था, लेकिन ऐसा प्यार जो छूने से पहले ही समझ जाता है, जो मिलने से पहले ही विदा ले लेता है। एक ऐसा रिश्ता जिसे शब्द नहीं बाँध सकते, पर आत्मा पहचान लेती है।”

Read More

मेरी नजरों में नेपाल — जैसा देखा, जैसा समझा

“अगर अलग मुद्रा की पहचान न होती, तो कभी न जान पाती कि किसी और ज़मीन पर हूँ!”
नेपाल—एक ऐसा देश, जहाँ हर गली, हर मोड़ पर आस्था की झलक है। साधारणता में भी गरिमा है, और गरीब कहलाने के बावजूद आत्मसम्मान की ऐसी मिसाल देखने को मिली जो अमीर देशों को भी सीख दे सके। महिलाएं व्यापार की कमान संभालती हैं, ईमानदारी हर चेहरे पर झलकती है, और हिंदी को जिस तरह से अपनाया गया है, वह दिल को छू जाता है। यह यात्रा केवल एक देश की नहीं, बल्कि आत्मिक अनुभव की रही।

Read More

“जहां से मैं शुरू हुई, वहां मैं नहीं रुकी”

प्रभा ने जीवन भर त्याग और समर्पण सीखा, लेकिन जब अपनी बेटी की बातों ने उसे आईना दिखाया, तो उसने खुद के अस्तित्व की तलाश शुरू की। आज, वह सिर्फ किसी की पत्नी या बहू नहीं, बल्कि एक शिक्षिका, एक मार्गदर्शक और एक सफल स्त्री है — अपनी पहचान के साथ।”

Read More

गांव में क्या रखा है…

लोग कहते हैं, “गांव में क्या रखा है?”
पर मेरे लिए गांव सिर्फ एक जगह नहीं, मेरे बचपन की थाती है।

वहीं दादी की कहानियां थीं, मां के हाथों से खाया निवाला था, नीम की ठंडी छांव, खेतों की हरियाली और चौपाल की गर्मजोशी थी। कुएं का पानी, पगडंडियों की धूल और पुराने बक्सों में बंद वो मासूम दिन – सब वहीं छूट गए हैं।
गांव की मिट्टी में सिर्फ धूल नहीं, मेरी जड़ें हैं।
जो कहते हैं “गांव में कुछ नहीं रखा,”
शायद उन्होंने कभी गांव को जिया ही नहीं।

Read More

मुंबई में आयोजित हुआ ‘केवल काव्य परिवार’ का भव्य काव्य संध्या समारोह

चेन्नई से पधारे कवि-उद्योगपति केवल कोठारी के सम्मान में हुआ आयोजन नवी मुंबई, 14 जून साहित्यिक प्रेमियों के लिए शनिवार की शाम खास रही, जब सेक्टर-21, खारघर में आयोजित हुई एक भावपूर्ण और भव्य काव्य संध्या। यह आयोजन “केवल काव्य परिवार” के संस्थापक, चेन्नई से पधारे उद्योगपति व कवि श्री केवल कोठारी के मुंबई आगमन…

Read More