गोवा के समुद्र तट पर परिवार के साथ बिताए भावनात्मक पल

वाह… गोवा… वाह !

गोवा की यह यात्रा शोर-शराबे से ज़्यादा स्मृतियों की शांति है। समुद्र की लहरें, माँ की यादें, पोते की ज़िद और परिवार के साथ बिताए पल—यह संस्मरण गोवा को महसूस करने की एक भावनात्मक कोशिश है।

Read More
तेते पाँव पसारिए जेती लंबी सौर कहावत पर आधारित संतोषपूर्ण जीवन

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर”

“तेते पाँव पसारिए, जेती लंबी सौर” केवल कहावत नहीं, बल्कि संतोष, आर्थिक समझदारी और दिखावे से दूर रहकर सुखी जीवन जीने का मार्गदर्शन है।

Read More
पुणे में वसंतोत्सव का समापन राहुल देशपांडे के बहारदार राग चंद्रकंस से हुआ। कुमार गंधर्व परंपरा, युवा कलाकार और शास्त्रीय संगीत के भविष्य पर विशेष रिपोर्ट।

सुरों में विनम्रता, स्वर में विरासत

राहुल देशपांडे के सुमधुर राग चंद्रकंस गायन के साथ पुणे के वसंतोत्सव का भावपूर्ण समापन हुआ। शास्त्रीय संगीत की परंपरा, विनम्रता और भविष्य का सुर-संदेश इस मंच से गूंजा।

Read More
अकेली वृद्ध माँ बैठी हुई, आँखों में आँसू और मन में पीड़ा, सामाजिक उपेक्षा का प्रतीक

क्यों वृद्धाश्रम में जाऊँ

यह कविता उस माँ की पीड़ा को स्वर देती है, जिसने जीवन भर अपनी संतान को सींचा, सँवारा और बड़ा किया, लेकिन अंत में उसी से वृद्धाश्रम जाने का आदेश मिला। यह रचना समाज से एक करुण सवाल पूछती है क्या माँ का अब कोई ठौर नहीं?

Read More

मित्र की मित्रता

यह कहानी एक ऐसे युवा की है जो अपने बीमार भाई के लिए पढ़ाई, करियर और भविष्य तक को दाँव पर लगाने को तैयार है। दोस्ती, परिवार और मानवता जब साथ खड़ी होती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है।

Read More

आखिर क्यों…?

यह कहानी एक ऐसे बुज़ुर्ग व्यक्ति की त्रासदी है जिसने जीवन भर अपने परिवार के लिए सब कुछ किया, लेकिन जीवन की साँझ में अकेलापन, उपेक्षा और भूख उसके हिस्से आई। यह लेख समाज से सवाल करता है क्या पुरुष का दर्द सचमुच अदृश्य होता है?

Read More
शहर बनते गाँव का दृश्य, जहाँ पक्के मकानों के बीच अकेलापन और रिश्तों की दूरी दिखती है

मिट्टी की खुशबू रोती रही

यह कविता गाँव से शहर बने समाज की उस पीड़ा को उजागर करती है, जहाँ पक्के मकानों के बीच रिश्ते कच्चे होते चले गए। मिट्टी की खुशबू, चूल्हे का धुआँ और अपनापन सब कुछ शहरी भीड़ में कहीं खो सा गया है।

Read More
रात के समय खिड़की के पास बैठा एक लेखक, कोरे काग़ज़ पर कलम से भावनाएँ लिखता हुआ

एहसासों का लावा…

लेखक केवल शब्द नहीं लिखता, वह अपने भीतर उमड़ते भावों को स्याही में घोलकर काग़ज़ पर उतारता है। कलम उसकी भावनाओं का वाहक बनती है और कोरा काग़ज़ अहसासों का सजीव संसार। यही लेखन श्रोताओं के दिल तक पहुँचकर अपनी अमिट छाप छोड़ देता है।

Read More
एक वरिष्ठ पत्रकार टूटी बाइक और छोटी दीवार पर संतुलन बनाकर मोबाइल से फोटो लेते हुए, पीछे भीड़ और राजनीतिक कार्यक्रम का दृश्य, पत्रकारिता के जुनून का प्रतीक।

एक क्लिक, जो पत्रकारिता का प्रतीक बन गया

वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा का एक फोटो-क्लिक मीडिया में वायरल होकर खुद एक “ख़बर” बन
गए। राहुल गांधी के दौरे के दौरान उन्होंने जोखिम भरा एंगल लेकर फोटो खींचा, और उसी क्षण उनका यह एक्शन पत्रकारिता के असली जुनून और समर्पण का प्रतीक बन गया जिसे RK स्टूडियोज के प्रसिद्ध लोगो की तरह मध्यप्रदेश की पत्रकारिता का प्रतीक बनाया जा सकता है

Read More