समाज में फिल्म माध्यम का महत्व सर्वाधिक

समाज के अंतिम छोर तक किसी भी विषय को पहुंचाने का कार्य फिल्म माध्यम के जरिए प्रभावी ढंग से होता है, इसलिए इस माध्यम का महत्व सर्वाधिक है, ऐसा मत प्रसिद्ध अभिनेत्री रेणुका दफ्तरदार ने व्यक्त किया. पी. एम. शाह फाउंडेशन और वर्धमान प्रतिष्ठान की ओर से आयोजित 14वें स्वास्थ्य फिल्म महोत्सव का समापन रेणुका दफ्तरदार की प्रमुख उपस्थिति में संपन्न हुआ

Read More

अहाना को धर्मेंद्र की दौलत नहीं, ये विरासत चाहिए

मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की बेटी अहाना देओल ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें पिता की संपत्ति या दौलत में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता की पहली कार, उनकी फिएट, को विरासत में चाहती हैं। उनका कहना था कि इस कार से जुड़े अनगिनत…

Read More
मुंबई में फिल्म राइटर के रूप में काम करती श्वेता बोथरा की प्रेरणादायक कहानी

शाबाश… श्वेता

उज्जैन के छोटे कस्बे महिदपुर रोड से आई श्वेता बोथरा ने हौसले, दृढ़ निश्चय और लगन से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई। महेश भट्ट और अनु मलिक के साथ डेब्यू कर उन्होंने साबित कर दिया कि असंभव कुछ भी नहीं। शिक्षा पूरी करने और मीडिया मैनेजमेंट में एमबीए के बाद श्वेता ने ओरकॉम एडवरटाइजिंग, इंदौर से करियर शुरू किया, लेकिन लेखन का जुनून उन्हें मुंबई ले गया।

उनकी लिखी फिल्म “तू मेरी पूरी कहानी” एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसे प्यार और करियर के बीच कठिन निर्णय लेना होता है। श्वेता की कहानी हज़ारों लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा है—सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए हौसला, मेहनत और जुनून ही सबसे बड़ा हथियार हैं।

Read More

पंजाब: संकट की घड़ी में मसीहा बने सोनू सूद

पंजाब इन दिनों भयंकर बाढ़ की चपेट में है. कई जिले पानी में डूब गए हैं, हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ऐसे मुश्किल वक्त में अभिनेता और समाजसेवी सोनू सूद एक बार फिर लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं.
सोनू सूद, जो खुद पंजाब से हैं, ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुँचाने का काम शुरू कर दिया है. टीम द्वारा भोजन, दवाइयाँ और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है. बचाव कार्यों में नावों का उपयोग कर कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है.

Read More

‘बेरंग’ ने खोले किशोरों के मन के दरवाज़े

सिर्फ बस्तियों या निम्न वर्गों में नहीं, बल्कि समृद्ध समाजों में भी किशोर अपराध देखने को मिलते हैं। हम तब ही इस पर चर्चा करते हैं जब कोई बड़ा हादसा हो, जैसे हाल ही में पुणे की पोर्श दुर्घटना। लेकिन हमें ऐसे मामलों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। सभी सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चों को समझने की जरूरत है।” यह विचार प्रसिद्ध लघु फिल्म निर्देशक राहुल पनशिकर ने नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (NFAI) में अपनी लघु फिल्म ‘बेरंग’ की विशेष स्क्रीनिंग के अवसर पर व्यक्त किए।यह फिल्म किशोरों की मानसिक और भावनात्मक जद्दोजहद को संवेदनशील तरीके से दर्शाती है।‘बेरंग’ का निर्माण राहुल्स ग्राफिक्स ने किया है और इसका समर्थन फ्लीटगार्ड फिल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है।

Read More