शून्य सा वज़ूद रखा कीजिए
एक करोड़पति इंसान, जो केवल अपनी कमाई में बढ़ते शून्य और दिखावे की भीड़ में संतुष्टि ढूंढता है, वास्तव में भीतर से सबसे दरिद्र हो सकता है। अमीरी केवल धन से नहीं, बल्कि विनम्रता, आत्म-संयम और नि:स्वार्थ सेवा से मापी जाती है। जो व्यक्ति अपने सामान्य कार्यों को करने में शर्म करता है और केवल दिखावे के लिए दान करता है, उसका अहंकार अंततः उसे अकेला छोड़ देता है। शून्य बनकर रहना सीखिए – जो किसी के साथ जुड़ जाए तो उसकी कीमत बढ़ा देता है, पर स्वयं का कोई घमंड नहीं रखता।
