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होली : आत्मीयता का पर्व

होली के अवसर पर रंगों से खेलते लोग, गुलाल और अबीर उड़ाते हुए, आत्मीयता और प्रेम का दृश्य होली : आत्मीयता, प्रेम और समरसता का पर्व

सुप्रसन्ना, प्रसिद्ध लेखिका, जोधपुर

फागुन बहे, उर में उमंगों का नव प्रकाश,
रंगों में भीगता हर एक मन-आकाश।
द्वेष-दहन कर प्रेम का करें अभिनंदन,
होली बने जीवन का मधुर अभिनव स्पंदन।

रंगोत्सव अर्थात होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा का उल्लासपूर्ण प्रकटीकरण है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है और शीत ऋतु के अवसान तथा वसंत के आगमन का संदेश देता है। प्रकृति जब नवपल्लवों से सुसज्जित होकर मुस्कुराती है, तब मनुष्य भी अपने भीतर संचित उदासी, द्वेष और कटुता को त्यागकर प्रेम और सौहार्द के रंगों में रंग जाना चाहता है।

होली के साथ अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं। भक्त प्रह्लाद की अटूट श्रद्धा और अत्याचारी हिरण्यकश्यप के अहंकार के विनाश की कथा हमें यह संदेश देती है कि सत्य और भक्ति की विजय निश्चित है। होलिका-दहन इसी विजय का प्रतीक है. असत्य, अन्याय और अहंकार के दहन का प्रतीक। इस अग्नि के माध्यम से हम अपने अंतर्मन की नकारात्मकताओं को भी जला देने का संकल्प लेते हैं।

दूसरे दिन रंगों की होली खेली जाती है। गुलाल, अबीर और रंगों की वर्षा में लोग भेदभाव भूलकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। यह पर्व सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करता है.जहाँ जाति, वर्ग, आयु या पद का भेद मिट जाता है। ग्रामीण अंचलों में फाग, धमार और होरी के लोकगीत गूँजते हैं; कहीं ढोल-मंजीरे की थाप पर नृत्य होता है तो कहीं हास-परिहास की मधुर छटा बिखरती है।

रंगोत्सव केवल बाह्य रंगों का उत्सव नहीं, अपितु भावनाओं के रंगों का भी उत्सव है। लाल रंग प्रेम और ऊर्जा का प्रतीक है, पीला आस्था और पवित्रता का, हरा नवजीवन और समृद्धि का, तो नीला अनंत आकाश जैसी व्यापकता का द्योतक है। इन रंगों के माध्यम से जीवन की विविधता और समरसता का संदेश मिलता है।

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भारतीय साहित्य में भी होली का विशेष स्थान रहा है। भक्त कवियों ने इसे ईश्वर-प्रेम की अभिव्यक्ति के रूप में चित्रित किया है, तो रीतिकालीन कवियों ने श्रृंगार और रसमयता से परिपूर्ण होली-चित्रण किया है। ब्रजभूमि की लट्ठमार होली हो या शांति और संयम से खेली जाने वाली पारिवारिक होली हर रूप में यह पर्व आनंद का संवाहक है।

आज के समय में पर्यावरण की रक्षा का ध्यान रखते हुए प्राकृतिक रंगों के प्रयोग की आवश्यकता है। जल-संरक्षण और स्वच्छता का ध्यान रखते हुए यदि हम होली मनाएँ, तो यह उत्सव और भी सार्थक हो उठेगा।

अंततः रंगोत्सव हमें यह शिक्षा देता है कि जीवन विविध रंगों का संगम है। सुख-दुःख, मिलन-विरह, आशा-निराशा सभी मिलकर जीवन को पूर्णता प्रदान करते हैं। होली हमें प्रेम, सद्भाव और उल्लास के रंगों में रंग जाने की सीख देती है। यही रंगोत्सव का सच्चा संदेश है. मनुष्य-मनुष्य के बीच आत्मीयता का सेतु-निर्माण।

इसी के साथ आप सभी को रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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