जयपुर में लेखनी का महाकुंभ

जयपुर में राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान का भव्य सम्मान समारोह

37 वर्षों की विरासत संग सम्मान और सृजन का उत्सव

रेनू शब्दमुखर, प्रसिद्ध लेखिका की रिपोर्ट

जयपुर।
शब्दों की शक्ति, स्त्री संवेदना और सृजन की ऊर्जा का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित सम्मान समारोह एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम ने साहित्यिक जगत को एक सूत्र में पिरो दिया। 20 फरवरी 2026 को राजस्थान प्रौढ़ शिक्षा समिति आयोजित यह समारोह लेखन, नेतृत्व सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण बन गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध साहित्यकार नीलिमा टिक्कू, अध्यक्षता प्रख्यात व्यंग्यकार एवं कवि डॉ. फारूक आफरीदी ने की। विशिष्ट अतिथि डॉ. शारदा कृष्ण एवं सारस्वत अतिथि डॉ. रमा सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की। मंजू लता भट्ट के सुरीले स्वर में सरस्वती वंदना के गायन साथ प्रारंभ हुए कार्यक्रम में संस्थान की अध्यक्ष डॉ. जयश्री शर्मा ने संस्थान की 37 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि संस्थान की संस्थापिका नलिनी उपाध्याय जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों को याद किया और कहा कि यह मंच आज अंतरराष्ट्रीय स्तर तक लेखिकाओं की पहचान स्थापित कर चुका है।


इस अवसर पर उपाध्यक्ष डॉ. रेखा गुप्ता द्वारा संपादित पुस्तक ‘हौसलों की उड़ान’ सहित आभा सिंह, सुशीला शर्मा की कृतियों का विमोचन किया गया। विमोचन सत्र ने आयोजन को सृजन पर्व का रूप दे दिया।
साहित्य साधना को मिला सम्मान
समारोह में साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली साहित्यकारों को सम्मानित किया गया.
वाग्मणि सम्मान-सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मंजु चतुर्वेदी कर्मश्री सम्मान-वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आरती भदोरिया,वेणु सम्मान- वरिष्ठ साहित्यकार आभा सिंह, श्रीमती नलिनी उपाध्याय सम्मान: वरिष्ठ साहित्यकार शशि सक्सेना, डॉ. सुमन मेहरोत्रा सम्मान: प्रख्यात कवयित्री सुषमा चौहान ‘किरण’ को मंचासीन अतिथियों तथा प्रबंध निदेशक सुधीर उपाध्याय, डॉ. जयश्री शर्मा डॉ. रेखा गुप्ता, रेनू शब्दमुखर और डॉ.सुषमा शर्मा ने शॉल, प्रमाण-पत्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर नवाजा।



मुख्य अतिथि नीलिमा टिक्कू ने कहा कि स्वतंत्र मंचों की बढ़ती संख्या के बावजूद इस संस्थान की जड़ें सबसे सशक्त हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. फारूक आफरीदी ने महिलाओं से व्यंग्य सहित सभी विधाओं में निर्भीक लेखन का आह्वान किया। डॉ. रमा सिंह और डॉ. शारदा कृष्ण ने स्त्री लेखन को समाज परिवर्तन की प्रभावी धुरी बताया। संस्थान की सचिव डॉ. सुषमा शर्मा ने वर्ष 2027 से दो बाल साहित्य पुरस्कार प्रारंभ करने की घोषणा की।
कार्यक्रम का प्रभावशाली एवं ऊर्जावान मंच संचालन संस्थान की सहसचिव रेनू ‘शब्दमुखर’ द्वारा किया गया, जिसकी अतिथियों एवं उपस्थित साहित्यकारों ने मुक्त कंठ से सराहना की। अंत में उपाध्यक्ष डॉ. कंचना सक्सेना ने भी अपने पिताजी की स्मृति में आलोचना विधा में पुरस्कार देने का घोषणा की तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।

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