महिला लेखन
दहलीज से साहित्य शिखर तक
माता-पिता के संस्कार, परिवार के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास के बल पर साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाने वाली शिक्षिका एवं कवयित्री की प्रेरक जीवन यात्रा। जानिए उनके लेखन, छंद साधना, संस्मरण प्रेम और सफलता के पीछे की कहानी।
जयपुर में लेखनी का महाकुंभ
जयपुर में 20 फरवरी 2026 को आयोजित राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान का सम्मान समारोह शब्द, सृजन और स्त्री संवेदना का अद्भुत संगम बन गया। समारोह में प्रतिष्ठित साहित्यकारों को सम्मानित किया गया तथा ‘हौसलों की उड़ान’ सहित कई कृतियों का भव्य विमोचन हुआ।
जो दिखता है, वह पूरा नहीं स्त्री जीवन के अनकहे अध्याय
शीशमहल” हो या “अंतिम प्रश्न”, कविता वर्मा की कहानियाँ उस स्त्री की कथा कहती हैं जो ना केवल अपनी भूमिका से बंधी है, बल्कि अपनी पहचान के लिए छटपटाती भी है। ये कहानियाँ घर के भीतर की उन संकरी गलीयों की पड़ताल करती हैं, जहाँ स्त्री होना एक उत्तरदायित्व नहीं, एक दंड जैसा महसूस होता है। लेखिका का दृष्टिकोण कहीं भी रोमैंटिक नहीं होता, बल्कि बेहद यथार्थपरक और भीतर तक धँसता हुआ है। स्त्री को सहानुभूति नहीं, समझ की ज़रूरत है — यही संदेश इन कहानियों की अंतर्धारा है।”
