नंद के घर आनंद भयो…भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर भक्ति, उल्लास और भावनाओं का संगम

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

महिदपुर रोड- श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस का आयोजन अत्यंत भक्तिमय, भावपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने एकाग्रचित्त होकर कथा श्रवण किया. पूरे पंडाल में भक्ति और आनंद का वातावरण देखने को मिला.
कथा प्रवक्ता पूज्य श्री सुनीलकृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन जीने की कला सिखाने वाला मार्गदर्शन है. उन्होंने बताया कि भागवत मानव को समाज में रहना, कर्म करना, जीवन को सार्थक बनाना और मृत्यु को भी उद्देश्यपूर्ण स्वीकार करना सिखाती है.
श्रीराम और वामन चरित्र का भावपूर्ण वर्णन
चौथे दिवस की कथा में वामन चरित्र, श्रीराम कथा और श्रीकृष्ण जन्मकथा का विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन किया गया. श्रीराम कथा के माध्यम से मर्यादा, त्याग और कर्तव्य के आदर्श प्रस्तुत किए गए, जिसने श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया.


श्रीकृष्ण जन्मकथा बनी विशेष आकर्षण

कथा का विशेष आकर्षण भगवान श्रीकृष्ण का जन्म प्रसंग रहा. व्यास जी ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ गया, तब कारागार की अंधेरी रात में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ. देवकी और वसुदेव के बंधनों का स्वयं खुल जाना, वासुदेव जी द्वारा बालकृष्ण को यमुना पार गोकुल पहुंचाना और आकाशवाणी का गूंजना, इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया.
झांकियों ने बांधा श्रद्धालुओं का मन

इस अवसर पर विजय जी मंडोवरा वासुदेव के रूप में और मायरा पंकज जी धनोतीय (मोहन भोग, नागदा) श्रीकृष्ण के स्वरूप में विशेष आकर्षण का केंद्र रहे. संपूर्ण कथा स्थल नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल के जयघोष से गूंज उठा.
रंगोली और सजावट ने बढ़ाई भव्यता

  • कथा स्थल को सतीश जी गंगवाल द्वारा बनाई गई सुंदर और रंगीन रंगोली ने और भी भव्य बना दिया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया.
    आरती और प्रसादी का आयोजन
    चौथे दिवस की आरती और प्रसादी के यजमान श्री शिवनारायण जी काला, सुपुत्र श्री दीपेश जी काला एवं समस्त काला परिवार रहे. यजमान परिवार ने श्रद्धा भाव से आरती और प्रसादी का आयोजन किया.
    मुख्य झलकियां
    -श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस भक्तिमय आयोजन
    -वामन चरित्र, श्रीराम कथा और श्रीकृष्ण जन्मकथा का भावपूर्ण वर्णन
    -श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग पर गूंजे जयकारे , वासुदेव और बालकृष्ण की झांकियों ने मोहा मन, भव्य रंगोली और साज-सज्जा से सुसज्जित कथा स्थल
    -आरती और प्रसादी में श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी
    -चौथे दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, कर्म और विश्वास की गहरी छाप छोड़ी और पूरा वातावरण श्रीकृष्णमय हो गया.

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