26 दिसंबर से 1 जनवरी तक चलेगा सात दिवसीय धार्मिक आयोजन

सुरेश परिहार, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
महिदपुर रोड- प्रस्तावित श्रीराम हनुमान मंदिर, महिदपुर रोड पर आगामी 26 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक भव्य एवं संगीत मयी श्रीमद्? भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है. कथा प्रवचन का दायित्व सुप्रसिद्ध कथा प्रवक्ता पूज्य पंडित श्री सुनील कृष्ण जी व्यास (बेरछा वाले) संभालेंगे. कथा प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से 4:00 बजे तक श्रीराम हनुमान मंदिर परिसर में संपन्न होगी.
आयोजकों ने बताया कि विगत वर्ष आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दिव्य प्रभाव तथा श्रद्धालुओं के भावपूर्ण सहयोग से श्रीराम हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर है. इसी पावन उद्देश्य की सिद्धि एवं धर्म-चेतना के विस्तार हेतु पुनः इस वर्ष कथा श्रवण का आयोजन किया जा रहा है. आयोजक समिति ने समस्त धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर श्रीमद्? भागवत कथा श्रवण का पुण्य लाभ लेने तथा मंदिर निर्माण के इस पावन कार्य में सहभागी बनने की अपील की है. यह जानकारी श्री राम हनुमान समिति ने दी

भव्य कलश यात्रा से होगा शुभारंभ
कथा का शुभारंभ 26 दिसंबर 2025, शुक्रवार को प्रातः 10 बजे भव्य कलश यात्रा से होगा. यह यात्रा गणेश मंदिर से प्रारंभ होकर कथा स्थल श्रीराम हनुमान मंदिर तक पहुंचेगी. इसी दिन श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य का विस्तृत वर्णन किया जाएगा.

प्रतिदिन के कथा प्रसंग इस प्रकार रहेंगे
26/12/2025 (शुक्रवार)-भव्य कलश यात्रा एवं श्रीमद् भागवत कथा महात्म्य
27/12/2025 (शनिवार)-सुखदेव आगमन, मैत्रेयविदुर संवाद, 28/12/2025 (रविवार)-ध्रुव चरित्र, शिव चरित्र, नरसिंह अवतार, 29/12/2025 (सोमवार)-वामन चरित्र, राम कथा, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव,
30/12/2025 (मंगलवार)-श्रीकृष्ण बाल लीलाएँ, गोवर्धन पूजा, छप्पन भोग दर्शन
31/12/2025 (बुधवार)-श्रीराधा-कृष्ण महारास, रुक्मणी विवाह बारात श्री शेषशायी विष्णु मंदिर से निकाली जाएगी.
01/01/2026 (गुरुवार)-श्रीकृष्णसुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष कथा एवं कथा विराम
1 जनवरी को होगा भंडारा-
कथा समापन के अवसर पर 01 जनवरी 2026, गुरुवार को सायं 4 बजे से भंडारा प्रसादी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है.

जिनके श्रवण समुद्र समाना,
कथा तुम्हारी सुभग हरि नाना।
भरहि निरन्तर होही न पूरे,
तिन्ह के हिय तुम्ह कहुॅं गृह रूरे।।
हे परमात्मा जिनके कान समुद्र के समान है और तुम्हारी कथा नदिया के समान है वह कान रूपी समुद्र कथा सुनते-सुनते कभी नहीं भरते हैं ऐसे हृदय में तुम निवास करना