Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

सपनों की उड़ान

हाड़ी पर खड़ा एक युवा सूर्योदय की ओर देखते हुए, सपनों और उम्मीदों का प्रतीक

संध्या दीक्षित

सपने ही हमारे अपने होते हैं,
उन्हें देखें, उन्हें जिएँ,
और हो सके तो
उन्हें हर पल
अपनी भावनाओं से पोषित करें।

उन्हें अपने पुरुषार्थ से सींचें,
और कर्म की हथौड़ी से
समय–समय पर
उन्हें धारदार बनाते रहें।

सदा याद रखें
सपने ही जीवन की ऊर्जा हैं,
ऊर्जा है तो जीवन गतिमान है;
अन्यथा ठहरा हुआ पानी भी
धीरे-धीरे मृतप्राय हो जाता है,
जो केवल कंकड़-पत्थर मारने पर ही हिलता है।

सपने हमें
दिशा और दशा–बोध देते हैं,
प्रयास करने पर
वे हमें शोहरत की बुलंदी
और आसमान की ऊँचाई तक पहुँचा सकते हैं।

सच तो यही है
सपने ही
हमारे मन में बसते हैं।
इन रचनाओं को भी पढ़ें और अपनी टिप्पणी दें-

हिज्र, सब्र और बदलते रिश्ते
मेरा पति और उसकी पत्नी
किरायेदार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *