Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

महकते ख़्वाबों की रात

हनीफ सिंधी प्रसिद्ध लेखक

घर मेरा किसी की ख़ुशबू से महकने लगा
क्यों ये दिल उसकी आहट से गूंजने लगा।

कोई चाप तो नहीं उभरी थी फ़िज़ाओं में,
फिर घर मेरे ये सन्नाटा कैसे बिखरने लगा।

किवाड़ तो बंद रखे थे हमने अपने घर के,
ये कौन आकर दरवाज़ा खटखटाने लगा।

रातें महकतीं, कुछ मेरी तन्हाई दूर होगी,
इसी बातों से दिल ज़ोरों से धड़कने लगा।

फिर खोल के देखा मैंने अपना दरवाज़ा,
हवाओं से अरमानों का दीया बुझने लगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *