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करवा चौथ

शारदा कनोरिया शुभा, वरिष्ठ कवयित्री, पुणे (महाराष्ट्र)

आज फिर सजा है आँगन, दीपों का हार,
साँझ उतर आई, चमक उठा श्रृंगार।
थाली में सिन्दूर, करवा में प्यार,
तू ही मेरा प्रेम है, तू ही मेरा संसार।

चाँद से पहले तेरी झलक को निहारा,
मन ने कहा यही है मेरा सहारा।
भूख-प्यास सब भुला दिया उस प्यार ने,
तेरे नाम की महक है मेरे हर विचार में।

करवा की लौ जैसे रिश्तों की डोर,
अटूट है, पवित्र है, अनुपम है ये भोर।
नयन बंधे हैं तेरे ही इंतज़ार में,
तू ही मेरा प्रेम है, तू ही मेरा संसार में।

सदियों से चलता आया ये विश्वास,
प्रेम नहीं चाहता कोई उपहास।
बस एक नज़र, एक मुस्कान का उपहार,
तू ही मेरा प्रेम है, तू ही मेरा संसार।

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