
मानसा, लेखिका, मुंबई
मिस्टर अंश भंडारी अपनी पत्नी अनुया और 4 साल की बेटी आन्या के साथ मॉल से बाहर आ रहे थे। आज संडे यानी उनका फैमिली डे था, इसलिये अच्छी-खासी शॉपिंग और मूवी देखने के बाद अब वे डिनर करने जा रहे थे।
अंश – कितनी अच्छी मूवी थी ना?
अनुया– सच में, अगर ऐसी मूवी से लोग इंस्पायर हुए तो कितना अच्छा होगा।
जैसे मूवी में अमीर आदमी एक गरीब बच्ची को गोद लेकर उसे काबिल बनाता है, वैसे ही सबके मन में मदद का भाव जगा तो समाज का रूप ही बदल जाएगा ना?
अंश – हम्म… ऐसा हुआ तो अच्छा, वरना आजकल लोग तो स्टेटस अपडेट करने के लिए दूसरों की मदद करते हैं।
छोटी आन्या लाल रंग का प्यारा-सा फ्रॉक पहने, एक हाथ में बलून और दूसरे हाथ में बड़ा-सा कपकेक्स का पैकेट पकड़े, अपने मम्मा-पापा के साथ चल रही थी।
उसका ध्यान अपने मम्मा-पापा की बातों में न होकर सामने था, जहाँ लगभग उसी की उम्र की बच्ची कुछ लोगों से भीख माँग रही थी, पर कोई उस पर ध्यान नहीं दे रहा था।
अनुया ने महसूस किया कि आन्या उससे अपना हाथ छुड़ाकर आगे जा रही है।
अनुया – आन्या रुको बच्चा, कहाँ जा रही हो?
पर तभी अंश ने उसे चुप रहने का इशारा करते हुए कहा – वो देखो, मूवी का असर।
उन्होंने देखा कि जो आन्या थोड़ी देर पहले बलून और कपकेक्स का पैकेट अपने से पलभर के लिए भी दूर नहीं कर रही थी, वही इस समय बड़ी आसानी से मुस्कुराते हुए दोनों चीज़ें उस बच्ची को दे रही थी। आन्या का यह रूप देखकर दोनों मुस्कुराते हुए उसके पास गए।
अंश ने उसे गोद में उठाकर सीने से लगा लिया और अनुया ने उसके गाल पर एक प्यारी-सी किस कर दी।
छोटी-सी मदद के बदले अपने मम्मा-पापा से इतना प्यार पाकर आन्या खिलखिला दी, और अपनी छोटी-सी गुड़िया से इंस्पायर होकर वे दोनों उस बच्ची को खाना खिलाने अपने साथ होटल ले गए।

बहुत प्रेरणा दायक कहानी मानसा। Well done
Bahut hi inspiring story.
Baccho main ye guun parents ke sanskaron se hi aate hain . 👏🏽👏🏽
Bahut hi sundar or prernadayak kahani hai….bachcho ko aesi hi kahani motivat karti hai .
Very nice
Nice story..!!👌👌
Jay ho
Excellent
आप की अमूल्य टिप्पणियों के लिए आभार-सुरेश परिहार
वास्तव में फ़िल्म का निर्माण केवल समाज में परिवर्तन लाने के लिए किया जाता है क्योंकि यह एक संदेश है समाज के लिए
अद्भुत 🙏
सकारात्मक सोच वाली कहानी। बहुत अच्छी रचना। Keep writing
बहुत सुंदर 👍
आप की अमूल्य टिप्पणियों के लिए आभार-सुरेश परिहार
Very inspiring
Very inspiring