मुंबई में आयोजित हुआ ‘केवल काव्य परिवार’ का भव्य काव्य संध्या समारोह

चेन्नई से पधारे कवि-उद्योगपति केवल कोठारी के सम्मान में हुआ आयोजन

नवी मुंबई, 14 जून
साहित्यिक प्रेमियों के लिए शनिवार की शाम खास रही, जब सेक्टर-21, खारघर में आयोजित हुई एक भावपूर्ण और भव्य काव्य संध्या। यह आयोजन “केवल काव्य परिवार” के संस्थापक, चेन्नई से पधारे उद्योगपति व कवि श्री केवल कोठारी के मुंबई आगमन पर उनके सम्मान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन और श्रीमती बिट्टू जैन “सना” द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात देशभर से आए कवियों और कवयित्रियों ने अपने काव्यपाठ से संध्या को यादगार बना दिया।

सबसे पहले, ओजपूर्ण कविताओं के लिए प्रसिद्ध श्री राजेश दुबे “अल्हड़ असरदार” ने “अब लाल किला भी मर्दानी बोली बोल रहा…” जैसी सशक्त कविता से माहौल में ऊर्जा भर दी। लाल बहादुर यादव “कमल” ने निर्गुण भजन और भोजपुरी श्रृंगार गीतों से श्रोताओं को भावविभोर किया।

श्रीमती सुमंगला सुमन, एक शिक्षिका और प्रतिभाशाली कवयित्री, ने अपनी संवेदनशील कविता प्रस्तुत की, जबकि सुमित्रा गुप्ता “सखी” ने सावन गीत के माध्यम से कार्यक्रम की रंगत में हरियाली घोली।

सीतामढ़ी, बिहार से पधारी श्रीमती प्रीती सुमन ने मां सीता पर आधारित हृदयस्पर्शी कविता और एक श्रृंगार रचना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। अन्नपूर्णा गुप्ता “सरगम” ने अपने मधुर गायन शैली में श्रृंगारिक रचना से खूब सराहना बटोरी।

ग़ज़ल विधा में निपुण श्रीमती बिट्टू जैन “सना” ने अपनी खूबसूरत श्रृंगार ग़ज़ल से श्रोताओं को मुग्ध किया। इसके अलावा श्रीमती सीमा त्रिवेदी ने अपने विचार और साहित्यिक दृष्टिकोण साझा किए।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में स्वयं श्री केवल कोठारी जी ने आध्यात्म और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी अपनी प्रभावशाली कविताएं प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया।


सम्मान और आत्मीय आतिथ्य

आयोजक श्रीमती बिट्टू जैन “सना”, उनकी बहनें श्रीमती डिंपल मेहता और श्रीमती निरूपा डोशी ने समस्त आमंत्रित कवियों और कवयित्रियों का गुलाब, लेखनी और दैनंदिनी भेंटकर आत्मीय सम्मान किया।

कार्यक्रम के उपरांत उपस्थित सभी साहित्यकारों को स्वादिष्ट डिनर पर आमंत्रित किया गया, जिसमें मेजबानों ने अतिथियों की गर्मजोशी से मेहमाननवाज़ी की। अंत में बिट्टू जैन “सना” ने सभी सहभागी साहित्यप्रेमियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त कर कार्यक्रम का समापन किया।

यह आयोजन न केवल एक साहित्यिक उत्सव था, बल्कि एक पारिवारिक आत्मीयता और सम्मान के भाव से भरा हुआ संध्या समारोह भी सिद्ध हुआ, जिसकी स्मृति प्रतिभागियों के मन में लंबे समय तक बनी रहेगी।

सुरेश परिहार, वरिष्ठ पत्रकार, पुणे

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